पेड़-पौधों को भी स्वस्थ बना रही होम्योपैथी की दवा

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Hahnemann Ki Aawaz Posted on03 – 05 – 2018

बरेली। बात 2003 की है। बरेली स्थित घर में बैठे-बैठे एक दिन होम्योपैथ डाॅक्टर विकास सोच रहे थे कि आखिर उनके नींबू के पेड़ में फल क्यों नहीं आ रहे। सोचा, दवा का प्रयोग करके देखते हैं। दवा दी और कुछ दिनों में पेड़ों की रंगत बदलने लगी। डोज बढ़ाई तो अच्छा परिणाम आया, फिर कल भी आए।
बस यही से उनके विचार को बल मिला कि होम्योपैथी सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, पेड़-पौधों के लिए भी कारगर है। इसके बाद उन्होंने गेहूं, धान, दलहन, तिलहन, फल और फुलवारी पर होम्योपैथी का सफल प्रयोग किया। आज 200 से ज्यादा किसान उनसे सलाह मशविरा कर खेती करते हैं। मूलतः पीलीभीत के रहने वाले डाॅ. विकास वर्मा बताते हैं कि खेती किसानी से उनका कोई वास्ता नहीं था। 96 में जयपुर से डाॅक्टरी पढ़कर आए। बरेली में प्रैक्टिस शुरू कर दी। बस मन में कुछ अलग करने की थी। इसलिए पेशे से इतर इस दिशा में बढ़े। वर्ष 2014-15 से वह पीलीभीत के खमरिया पुल स्थित खुद के पांच एकड़ के फार्म हाऊस -‘तत्वम’ में खास जैविक अमरूद ‘सुपर बीही’ पैदा कर रहे हैं और गन्ने पर काम कर रहे हैं। किसानों को अब वह फ्री कंस्लटेंसी और दवाएं देते हैं।

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