सात साल बाद लागू हो रहा है क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट

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Hahnemann Ki Aawaz Posted on 18 – 11 – 2017
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार करीब सात साल पहले बने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने के लिए तैयार हो गई है। इससे हरियाणा के निजी अस्पतालों में अब मरीजों को सस्ता और सुलभ इलाज मिलेगा। साथ ही अस्पतालों को नियमों के दायरे में रहकर अपना काम करना होगा।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के अनुसार एक्ट को लागू करने में कुछ दिक्कतें थी, जिन्हें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हरियाणा इकाई के साथ बातचीत के बाद दूर कर लिया गया है। विज के मुताबिक यह एक्ट पूरे हरियाणा में लागू होेगा। एक्ट के तहत सबसे पहले पंजीकरण किया जाएगा और उसके बाद एक कमेटी बनेगी, जो अस्पताल स्थापित करने के लिए मानदंडों का निर्धारण करेगी। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार प्रदेश में जो भी अस्पताल इस एक्ट का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। एक्ट के नियमों से जुड़े सवाल पर उन्होंने बताया कि नियम बनाकर उन पर चर्चा हो चुकी है। एक्ट को लागू करने के उपरान्त ही प्राईवेट क्लीनिक की जांच प्रक्रिया आरम्भ की जाएगी। उधर, आईएमए हरियाणा का कहना है कि इस एक्ट के लागू होने से मरीज के इलाज का खर्चा महंगा होगा।
प्राईवेट अस्पताल की कमाई पर सीधा असर: दरअसल एक्ट के लागू होने के बाद प्राईवेट अस्पतालों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि कानून में इलाज में पारदर्शिता लाने के लिए तमाम नियम हैं। इसके तहत कोई भी चिकित्सक या अस्पताल मरीज से मनमाने पैसे नहीं ले सकता। साल 2010 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेबिलस्टमेंट एक्ट पारित किया था। इस कानून के माध्यम से हर प्राईवेट अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर, नर्सिंग होम व क्लीनिक की जवाबदेही तय की गई है।
पहले था कुछ ही राज्यों के लिए कानून: शुरूआत में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट अरूणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और सिक्कम राज्यों के लिए बनाया गया था। दूसरे राज्यों के पास विकल्प था कि वे इसे अपने यहां लागू करें या न करें। इसके बाद पांच राज्य राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, असम और उत्तराखंड ने इसे स्वीकार किया।
ये है एक्ट के खास पहलू: भ् हर मरीज का इलेक्ट्रोनिक हेल्थ रिकार्ड और मेडिकल हैल्थ रिकार्ड अस्पताल प्रशासन के पास सुरक्षित होना चाहिए।
भ् यह एक्ट मेटरनिटी होम्स, डिस्पेंसरी, क्लीनिक, नर्सिंग होम, ऐलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर समान रूप से लागू होता है।
भ् हर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन जरूरी है जिससे सुनिश्चित किया जा सके कि वे लोगों को न्यूनतम सुविधाएं और सेवाएं दे रहे हैं।
भ् किसी भी रोगी के इमरजेंसी में पहुंचने पर उसको तुरंत स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करानी होगी।
भ् अस्पतालों को स्वास्थ्य सेवाओं की एवज में ली जा रही कीमत पर अंग्रेजी और हिंदी भाषा में चस्पा करना होगा।
एक्ट की इन बातों का विरोध कर रहे डाक्टर
भ् डाक्टरों की सबसे अधिक नाराजगी सेक्टर 12 (2) से है। इसमें कहा गया है कि इमरजेंसी में मरीज अस्पताल पहुंचता है तो ऐसे सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं लेकिन इलाज का खर्च कौन उठाएगा, यह कानून में स्पष्ट नहीं है।
भ् इस कानून से भ्रष्टाचार और इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। अल्ट्रासाउंड कंेद्र पर पहले से सीएमओ ने मनमानी बढ़ा रखी हे।
भ् सेवाओं की फीस सरकार की बजाए डाक्टर ही तय करें।

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