भारत में अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन

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(Hahnemann Ki Aawaz - Posted on 29 - 11 - 11 )

इंटरनेशल होम्योपैथिक मेडिकल लीग (एल.एम.एच.आई.)  दिल्ली में 1 से 4 दिसम्बर तक अपना 66वां अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस आयोजित कर रहा है।

दिन प्रतिदिन स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याएं और महंगी होती एलोपैथी ने आम लोगों को होम्योपैथी सरीखी सस्ती और प्रमाणिक चिकित्सा पद्धति की तरफ तेजी से आकर्षित किया है। एलोपैथी के महंगे इलाज और दवाओं की आसमान छूती कीमतों से विश्व स्वास्थ्य संगठन (वि.स्वा.सं.) भी खफा है। अभी हाल ही में जारी अपने एक विशेष रिपोर्ट में उसने माना है कि भारत में 70 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी हैसियत से ज्यादा अपने इलाज पर खर्च करने पर मजबूर हैं और इसकी वजह से वे गरीब हो रहे हैं। अभी कुछ ही महीने पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने भी माना है कि आज स्वास्थ्य सेवाएं आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। वि.स्वा.सं. यह स्वीकार करता है कि भारत सहित अन्य विकासशील देशों में जन स्वास्थ्य की समस्याएं प्रतिदिन गहरा रही हैं। इस प्रष्टभूमि में होम्योपैथी की अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशल होम्योपैथिक मेडिकल लीग (एल.एम.एच.आई.) दिल्ली में 1 से 4 दिसम्बर तक अपना 66वां अंतरराष्ट्रीय कांग्ररेस आयोजित कर रहा है।

भारत सरकार के केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद के अधयक्ष एवं 66वें अंतराष्ट्रीय होम्योपैथिक कांग्रेस के चेयरपर्सन डा. रामजी सिंह बताते हैं, ‘आस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, बेल्जियम, ब्राजील, इटली, जापान, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, आयरलैंड के अलावा कई देशों सहित भारत के विभिन्न प्रदेशों से कोई ढ़ाई हजार से ज्यादा होम्योपैथिक चिकित्सक इस सम्मेलन में भाग लेंगे और 300 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। डा. सिंह कहते हैं, ‘आज के दौर में होम्योपैथी की लोकप्रियता और उपयोगिता की यह मिसाल है कि इसकी प्रगति सालाना 25 फीसदी से भी ज्यादा रिकार्ड की गई है।’’ उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष उद्योग व व्यापार जगत की संस्था एसोचेम ने होम्योपैथी की विकास दर 25 फीसदी बताई है।

अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक कांग्रेस के आयोजन सचिव डा. आर.के. मनचंदा सम्मेलन के उदघोष वाक्य ‘जन स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी’ को महत्वपूर्ण बताते हुए कहते हैं कि भविष्य में भारत में बढ़ती जन स्वास्थ्य की समस्याओं से लड़ने में होम्योपैथी की बड़ी भूमिका होने वाली है इसलिए होम्योपैथिक चिकित्सकों और चिकित्सा अध्येताओं को जनस्वास्थ्य पर विशेष धयान देना होगा। इसमें संदेह नहीं कि भारत में 1810 से शुरू हुई चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी ने विकास और गुणवत्ता के अनेक मिसाल कायम किए हैं। केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद एवं देश के 485 होम्योपैथिक कालेजों में तैयार हो रहे होम्योपैथिक चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने कई जानलेवा एवं गंभीर रोगों के सरल उपचार पर सघन काम किया है। भारत के सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी जहां एलोपैथिक चिकित्सक जाना नहीं चाहते वहां होम्योपैथी के सात लाख पच्चीस हजार पांच सौ अड़सठ (725568) पंजीकृत होम्योपैथ विषम परिस्थितियों में भी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों ने होम्योपैथी के विकास के लिए कदम उठाए हैं लेकिन यह नाकाफी हैं।

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट पर गौर करें तो ‘इन्वेस्टिंग इन हेल्थ’ नामक इस रिपोर्ट के अनुसार देश में आम आदमी अपने उपचार पर कोई 95,000 करोड़ से भी ज्यादा रुपए खर्च कर देता है। इसका परिणाम है कि सालाना 3.25 करोड़ लोग महंगे उपचार की वजह से गरीबों रेखा के नीचे चले जाते हैं। यदि सरकार सालाना 6,000 करोड़ रुपए इन बीमार लोगों पर खर्च कर दें तो 89,000 करोड़ बच सकते हैं। केंद्रीय होम्योपैथिक प्राध्यापक एवं आचार्य डा. अरूण भाष्मे कहते हैं, ‘होम्योपैथिक को भारत ही नहीं, दुनिया में जन सेवा का माधयम बनाना इस अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य है।’

आगामी 1 दिसम्बर से शुरू होकर 4 दिसम्बर तक चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन होम्योपैथी की गुणवत्ता विकास एवं व्यापकता पर चर्चा के साथसाथ भविष्य की संभावनाओं और अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज्यादा बल देगा। अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक मेडिकल लीग के मानद अध्यक्ष एवं भारत के राष्ट्रपति के पूर्व मानद चिकित्सक डा. दीवान हरीशचंद्र कहते हैं ‘हम होम्योपैथी के स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर रहे हैं। आज से 40 वर्ष पूर्व जब हम लोग होम्योपैथी की बात करते थे तब लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते थे लेकिन अब समय बदल रहा है।’

जाहिर है कि होम्योपैथी में संभावनाएं बढ़ रही हैं तो जिम्मेवारी भी बढ़ेगी और देश तथा दुनिया के होम्योपैथिक चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों को रोग की किसी भी चुनौती से निबटने के लिए तैयार होना पड़ेगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि आम लोगों की चिकित्सा के अलावा उन्हें एक सस्ती और हानि रहित चिकित्सा पद्धति का लाभ भी मिले।

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A.K.Arun

Dr.A.K.Arun, M.D (Homeo), , L.M.H.I.(Geneva)National Award Winner,

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