करनाल मे कैमिस्ट दुकानदारों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान

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Hahnemann Ki Aawaz Posted on 02 – 05 – 2018
कैमिस्ट देते है मरीजो को उनकी बीमारी पूछ कर दवाइयां।  प्रशासन और सरकार खामोश
करनालदीप:_ आजकल प्रदेश मे  मैडिकल स्टोरो की संख्या तेजी से बढ रही है और इन दुकानो पर अरबों रूपये का व्यापार हो रहा है परन्तु इन सब दुकानो पर बहुत गोरख धंधे हो रहे है जो आम आदमी का आर्थिक शोषण तो कर ही रहे है लोगो  की जिन्दगी से खिलवाड़ कर रहे है। करनाल जिले मे ही हजारो कैमिस्ट शाप चल रही है जिनमे ज्यादातर अंग्रेजी दवाइयां  बेची जाती है। ग्राहक को अपनी तरफ खीचने के लिए कोई 10% से 20% तक अलग अलग विक्रेता दवाईयों के एम आर पी पर छूट दे रहे है जबकि कई दवाईयों के एम आर पी कई गुणा है।  सबसे बडी देखने वाली बात तो यह है की यह मैडिकल शाप मरीजो को दी गई  दवाईयों का कोई बिल नही देते। यह या तो एक खाली कागज पर बिना दवाई के नाम लिखे सिर्फ पैसे लिख देते है जितना टोटल बना उस पर डिस्काउन्ट  काट कर पैसे ले लेते है और ग्राहक खुशी खुशी छूट सोचकर दवाईयों की पेमेन्ट कर देता है। कुछेक दूकानदार तो सिर्फ कैलकुलेटर पर ही ऊँगली  चलाकर बिल बना देते है उसमे कूछ पता नही चलता की किस दवाई के कितने पैसे लिए और टोटल ठीक भी हुआ या नही।सब कुछ अंधेरा या अंध विश्वा इसके इलावा 80% मैडिकल शाप पर मरीजो से पूछ कर उनकी बीमारी अनुसार तुक्के से दवाईया दी जाती है जो बहुत ही खतरनाक है। यह परम्परा होम्योपैथी  मैडिकल स्टोर पर भी पनप रही है। प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग इन चीजों पर पूरी तरह खामोश है। ऐसा लगता है की स्वास्थय विभाग के अधिकारियों  की मिलीभगत से यह गोरख धंधा चल रहा है और लाखो रूपए  भ्रष्ट  ढंग से कमाए जा रहे है वह चाहे स्वास्थ्य  विभाग हो या मैडिकल स्टोर संचालक। ऐसा भी सुनने को आया है की कुछेक मैडिकल स्टोर पर फार्मेसीस्ट का  सिर्फ लाईसेंस  किराए पर है वहां  फार्मेस्सिट बैठता ही नही और एक ही लाईसेंस कई कई मैडिकल स्टोर पर चलाए जा रहे है। यह लूट और मरीजो के स्वास्थ्य  के साथ खिलवाड़ का खेल रोकने के लिए सरकार अगर सख्त कदम उठाए तो आम जनता को जो दवाईयों की खरीद पर घपला और झोला छाप डाक्टर  के रूप मे मैडिकल स्टोर काम कर रहे है का भंडाफोड हो सकता है जो बहुत जरूरी है। परन्तु अगर यह नही होता तो माना जाएगा की सरकार ही इन अवैध कार्यो को बढावा देकर भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शिता  के साथ साथ दिखावटी ईमानदारी का स्वांग  कर रही है। आयकर विभाग और सेलटैक्स विभाग भी इस प्रकार की जा रही करोडों की कालाधन जमा करने की नीति पर जांच करे।नर्सिग होमो पर तो इन मैडिकल स्टोरी पर न छूट मिलती है न कोई बिल। दवाईया भी अलग अलग कम्पनियों की हर नर्सिग होम की कैमिस्ट शाप पर मिलती है जिससे मजबूर होकर मरीजो को वही से दवाइयां  खरीदनी पडती है जिससे उन्हे हजारो रूपए की चपत लगती है।
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